हिंदू धर्मावलंबी यदि ज्योतिष एवं वास्तु को व्यवहार में लाएं तो क्या उन्हें कोई दोष या पाप लगेगा?

इस विषय में मेरा कहना है कि जाति इनसान की होती है, प्रकृति या ईश्वर की नहीं। वास्तु हमारी पृथ्वी और ब्रह्मांड की ऊर्जा रेखाओं के संतुलन से संबंधित एक विज्ञान है। हमारा शरीर, वातावरण और कर्म एक सूत्र में कैसे पिरोए जाएं, हम अपनी क्षमताओं का संपूर्ण लाभ किस प्रकार उठाएं, प्रभु से प्राप्त इस जीवन को कैसे अधिक अर्थपूर्ण बनाएं, इन सभी अभिलाषाओं की पूर्ति का माध्यम ही वास्तु है। विभिन्न कालों में, विभिन्न सभ्यताओं ने, विभिन्न वैकल्पिक विज्ञानों का अविष्कार किया है। ये सभी अविष्कार धर्म, जाति, लिंग, संप्रदाय पर आधारित न होकर पृथ्वी, पंचतत्व, रंग, आकार, अंक आदि पर निर्मित है। अतः आप किसी भी प्रकार से ज्योतिष एवं वास्तु को देश, धर्म, काल से न जोड़ें। इसके करवाने से आपको फायदा ही होगा लेकिन इस बात का ध्यान रहे कि इसका प्रयोग सदा वास्तु एवं ज्योतिष विशेषज्ञ से ही करवाएं।

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